जिसके जीवन में चिंगारी नहीं, वह पत्रकार नहीं बन सकता – डॉ. कोठारी
October 10, 2019 • Media Vimarsh

भोपालजिसके जीवन में चिंगारी नहीं, वह पत्रकार नहीं बन सकता है। जिंदगी में यदि उजाला चाहिए तो इसके लिए आपको तपना पड़ेगा। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में बुधवार को ये विचार पत्रिका समूह के प्रधान संपादक डॉ. गुलाब कोठारी ने दिशा बोध कार्यक्रम के अंतर्गत “समाज, संस्कृति और पत्रकारिता” विषय पर आयोजित विशेष व्याख्यान में व्यक्त किए। व्याख्यान से पूर्व विश्वविद्यालय के कुलपति श्री दीपक तिवारी ने डॉ. कोठारी का शॉल, श्रीफल, प्रतीक चिन्ह एवं पुस्तक भेंट कर स्वागत किया। संचार विशेषज्ञ, लेखक एवं वरिष्ठ पत्रकार डॉ. गुलाब कोठारी ने अपने विशेष व्याख्यान में समाज, संस्कृति एवं पत्रकारिता के हर पहलू को बहुत ही संजीदगी व गंभीरता के साथ छुआ। अपने आपको विश्वविद्यालय का एक हिस्सा बताते हुए श्री कोठारी ने विद्यार्थियों से कहा कि आपको ये संकल्प लेना होगा कि मेरी कलम ही मेरी आत्मा होगी। मैं खुद से कभी कोई झूठ नहीं बोलूंगा । उन्होंने कहा कि पत्रकारिता में पाठक ही आपका भगवान होता है, इसलिए यदि आपने पाठक के मन को जीत लिया तो समझो सब जीत लिया।

        पत्रकारिता को प्रोफेशन नहीं, मिशन बताते हुए उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि पहले वे यह तय करें कि वे पत्रकार क्यों बनना चाहते हैं, सबसे पहले अपना लक्ष्य बनाएं। आप जो सपने देखेंगे वही तो आप बनेंगे इसलिए पहले जीवन को भीतर से देखना सीख लो। पत्रकारिता में हमें पहले खुद को देखना होगा, चिंतन करना होगा। पहले खुद को समझो, पहले एक अच्छा इंसान बनो, इसके बाद फिर एक पत्रकार बनना । पत्रकार के तौर पर आप दूसरों के साक्षात्कार लेते हो, लेकिन क्या कभी आपने अपना साक्षात्कार लिया है। इसके लिए आपको खुद का साक्षात्कार करना होगा।

      विश्वविद्यालय के कुलपति श्री दीपक तिवारी ने अपने वक्तव्य में पारम्परिक कक्षाओं से ऊपर उठकर भविष्य में कैसी कक्षाएं होनी चाहिए इस पर बहुत ही महत्वपूर्ण बात कही। आज के दौर में प्रैक्टिकल आधारित चीजों को ध्यान में रखते उन्होंने हुए क्लास-रुम को न्यूज-रुम बनाने का विचार रखा। श्री तिवारी ने कहा कि हम ऐसे पत्रकार तैयार करना चाहते हैं जो कमजोर की आवाज बनें और सवाल उठाएं। भारतीय समाज, शिक्षा एवं संस्कृति पर बोलते हुए कुलपति ने कहा कि हमारी संस्कृति नैतिक बल की संस्कृति है। हमारी संस्कृति क्षमा, अहिंसा, दया की संस्कृति है और गांधीजी इसके ध्वजवाहक रहे हैं।